"सात साल की कहानी"
"सात साल की कहानी" एक राधा थी, एक सत्तू था, इंस्टा पे हुई मुलाक़ात का आग़ाज़ था। चंद लाइक्स से बढ़ी बातों की रातें, कभी हँसी, कभी शिकवे, कभी चाहतों की सौगातें। धीरे-धीरे दिल की दीवारें गिरने लगीं, चुपके से मुलाक़ातें होने लगीं। कभी मौसम गुलाबी, कभी खामोशियाँ भारी, हर लम्हा बन गया एक अधूरी कहानी। कभी वो ब्लॉक करता, तो दिल टूटा सा लगता, फिर अनब्लॉक कर, जैसे फिर से पास बुला लेता। कभी लगता — "शायद एकतरफा मोहब्बत है ये", तो कभी — "उसके लफ़्ज़ों में बस मैं ही बसी हूँ ये"। कहता — "तेरे बिना कोई नहीं मेरा", फिर ऐसे दूर हो जाता — जैसे कुछ था ही नहीं मेरा। हर बार खुद को संभाला, फिर भी टूटी रही उम्मीद, सात साल बीते… और मैं बस उसकी ही रही थी पीर। मैंने निभाया हर रंग इस रिश्ते का, चाहे मिला हो दर्द या बस झूठा सपना। वो आया, गया, फिर लौट आया कई बार, पर मैं वहीं रही — एक ही इंतज़ार। अब दिल कहता है — "क्या मोहब्बत इतनी कमजोर होती है?" या फिर मैं ही शायद बहुत मजबूर होती हूँ।
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