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तुझे तेरे घमंड में नही आ रही तेरी गलती नजर । क्यू देता है औरों को दोष , क्यू नही देखता तू अपने कर्म। क्या मिल जायेगा तुझे भोले सीधे लोगों पर चिल्ला कर , जब टूटेगा तेरा घमंड , तब आयेगी तुझे खुद पर शर्म । क्यू नही देखता तू उसका व्यवहार नर्म । क्यू होता रहता है तू इतना गर्म । अभी सुधर जा समय है मेरे लाल , और ज्यादा बिगड़ा तो हो जायेगा तेरा बुरा हाल । शांत मन से पूछ खुद से एक सवाल , कि तू सही है सच में या यूं ही मचा रखा है बबाल।।
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