एक लड़की
एक लड़की हँसमुख चंचल सी,, बेखौफ़ बहादुर, जिंदादिल सी, सबसे हँसकर जो मिलती थी, गुमसुम सी वो रहने लगी हैं,, बातें अपनी ख़ुद ही ख़ुद से, मन ही मन वो कहने लगी हैं,, अपनी उलझनें, डर और चिंताएं, दूसरों से छिपाने वो लगी हैं,, शायद कोई नहीं समझेगा उसके दर्द को,; यही सोच, बेवजह मुस्कुराने वो लगी हैं, जिससे थी आस, उसने हर बार मायूस किया, पास होकर भी उसने, दूरियों को महसूस किया, इसीलिए, अकेले अब वो रहने लगी हैं,, किससे कहे, करें अपने दर्द को बयाँ, कोई नहीं हैं, जो बन सकें उसकी दवा, इसीलिए, ख़ुद को ही दिलासा वो देने लगी हैं,, एक लड़की हँसमुख चंचल सी, ख़ुद ही अपना साथ निभाने लगी हैं,, ख़ुद ही ख़ुद को अपनाने लगी हैं, दूसरों से क्या करना आरज़ू, ख़ुद ही ख़ुद को चाहने,लगी हैं,, एक लड़की हँसमुख चंचल सी,, फिर से मुस्कुराने वो लगी हैं,,!!!
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