शास्वत प्रेम
प्रेम का मतलब मुझे समझाना था इसलिए जीवन के इस सफर में तुम्हे साथ आना था तुम्हारे संग, बीत जाता हर क्षण है तुम्हारा प्रेम ही मेरा आकर्षण है तुम ही मेरी विजय, तुम ही प्रतियोगिता हो तुम हो मेरा कलम, तुम ही मेरी कविता हो, तुम्हारे साथ मैं साक्षी हूं, जीवन के हर एक क्षण का तुम सिर्फ प्रेम नही, तोहफा हो नारायण का
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