कविता : एक नया सवेरा
एक नया सवेरा हर दीन का है खामोशी के तले क्या कहना है मंजिल दूर नहीं होती ओ पास है हम उसे एक दफा से पैमाना है !! खुले आम ये हवाऐ हमे याद करे सादगी भरी ये दो पल आहे भरे नशीली ये दो नयन देखने को डूबी है तेरे बाहो से गुजरते हुवे ओ एक बहाना है !!! हसता हुआ चहेरा बहुत खूबसुरत लगता है तेरे प्यार और फसाने कुछ हमे फरमाता है हर वक्त का पहरा गीर के संभालना है मधूर शीतल के तरह एकान्त रहना है !!!! धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२
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