🌷
राय किसी पर जब दिया कीजिए, खुद को भी जरा परखा कीजिए। हर कोई जाहिर हो नही सकता, सबकी बातें तब भी सुना कीजिए। खुमार अमीरी का उतर जाएगा , यूँ ना किसी का तब्सिरा कीजिए। मौजों मे खानी तो हमेसा रहेगी, आप भी मुसलसल बहा कीजिए। फीना अंदाजी से क्या ही मिल, जख्म-ए-जिगर आप भरा कीजिए।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
