प्यार
प्यार तो है, पर अब वो बात नहीं, लबों पे शब्द हैं, पर वो रात नहीं। इज़हार भी है, एहसास भी साथ, मगर धड़कनों में वो जज़्बात नहीं। परवाह तो है, हर लम्हा कायम, पर अब उस बेपरवाही की सौगात नहीं। इश्क़ भी है, खामोशी में बसा, मगर खुलकर कहने की अब औक़ात नहीं। सब कुछ तो है, तस्वीर मुकम्मल, बस उस तस्वीर में अब वो प्यार नहीं।
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