दोहा
जीवन के दिन चार। मानव गर्व न कीजिए, जीवन के दिन चार। सबसे हिलमिल कर रहें, दिल का बनें उदार।। जीव ईश की देन है, जानो इसका सार। पाले प्रभु संसार को,करता बेड़ा पार।। जीवन के दिन चार हैं, कपट अहं दो त्याग। लोचन खोलो ज्ञान का, अब तो मानव जाग।। कर्म वही जो कीजिए, लोक-वेद अनुकूल। कद्र करें सब जीव का, मंत्र यही है मूल।। ऊँच-नीच मानो नहीं, सबसे कर लो प्यार। जीवन के दिन चार हैं, सत्य करो स्वीकार।। नरेंद्र सिंह21.04.2025
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