मौन मन ने वार किया आक्रामक निष्क्रिय, होठों की चुप्पी आंखों में बरसते चिंगारियों से बयान हुई, सन्नाटे में ऐसा तनाव छाया कि सारी टेढ़ी अंगुलइया खुद ही सीधी हो गई।