नारी
नारी तुझ पर हर युग में अत्याचार हुआ। कभी छल कपट, कभी भुजबळ से बारम्बार हुआ।। कभी मारा गया, कभी जलाया गया, तो कभी काल कोठरी में जिन्दा लटकाया गया। कभी दहेज की मार, कभी सामूहिक बलात्कार की शिकार, तो कभी लव जिहाद के नाम पर दुराचार हुआ।। नारी तुझ पर बहुत अत्याचार हुआ। आर्यव्रत में तो कुछ हीं थे दुष्कर्मी, अब तो चारो और दुशासन दुर्योधन जैसे न जाने कितने हैं कुकर्मी।। तब तो "कृष्ण" ने "द्रौपदी" का चीर हरण बचाया। अब तो तुझे राजनीति ने भी भेंट चढ़ाया।। खूब वाद हुआ विवाद हुआ, फिर भी संसद में सिर्फ विचार हुआ। देखो यह कैसी विडंबना नारी तेरे सम्मान में न कड़ा कानून हुआ।। कभी "निर्भया" कभी "उन्नाव" तो कभी "हाथरस" कांड हुआ। और अब कोलकाता में "निर्भया" तेरे कातिलों को जिन्दा देखकर लगता है आजादी के 77 वर्ष बाद मेरा देश फिर से गुलाम हुआ।। ......✍️ उम्मेद राठौड़
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