छंद-- हरिप्रिया / चंचरी / चंच
शीर्षक-- जीवन सुखदाई। मेरे प्रभु हैं उदार, करते जो नाव पार, देते सुख हर प्रकार, उनकी प्रभुताई। मिलती मस्ती बहार, प्रभु देते बार-बार, जीवन लगता न भार, और न दुखदाई।। संकट देते उबार, होने देते न हार, किस्मत देते सुधार, पाट दुःख-खाई। ईश्वर हैं अति उदार, उर को देते निखार , करें सृष्टि को दुलार जीवन सुखदाई।। जब हैं प्रभु राम साथ, मुझे समझ मत अनाथ, वही दिये नेक पाथ, राजा रघुराई। बनकर जो राम दास, जो रखते पूर्ण आस, ईश वही एक खास, करते भरपाई।। जो न करे राम जाप, उसका मिटता न पाप, झेलता विभिन्न ताप, सहे जग हँसाई। उसका ही यह कमाल, सबको रखता सँभाल, अमन-चैन कर बहाल, जीवन सुखदाई।। नरेंद्र सिंह 09.06.2025
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