सरसी छंद
सद्गुरु कृपा अनंत। मूढ़ बने विद्वान जगत में, सद्गुरु कृपा अनंत। बिन गुरु कोई तरा न जग में, कहते ज्ञानी संत।। गुरु बिन कोई ज्ञान न पाया, देव करें गुणगान। राम कृष्ण गुरु अनुकम्पा से, बने पूज्य भगवान।। इनकी महिमा आदि काल से, गूँजे सकल दिगंत। मूढ़ बने विद्वान जगत में, सद्गुरु कृपा अनंत।। बोपदेव या कालिदास हों , मूर्ख बने विद्वान। सकल विश्व में विद्व कहाए, पाकर गुरु वरदान।। चंद्रगुप्त ने सत्ता पायी, मिले चाणक्य संत। मूढ़ बने विद्वान जगत में, सद्गुरु कृपा अनंत।। गुरु महिमा सब कोई जाने, जैसे प्रखर दिनेश। वेद ग्रन्थ भी इनको माने, ब्रह्मा विष्णु महेश।। ज्ञान दीप को यही जलाते, रखें सदा जीवंत। मूढ़ बने विद्वान जगत में, सद्गुरु कृपा अनंत।। नरेन्द्र सिंह
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