सपना
असमतल सड़कों पर धक्के खाते ऑटो पर उपर नीचे होते मेरे सपने, 9:30 से 4:30 की नौकरी में पीछे छुटते मेरे अपने। फिर भी लड़ना और ख्वाबों को पालना, कुछ यूँ खुद को संभाल रही हुँ मैं, आँखों में ख्वाब मेहनत से पाल रही हूँ मैं।। Nainsi tiwary
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
