"मैं एक सपना रह गया"
मैं एक सपना हूँ जो देर सुबह तक देखता हूँ खुद को खुद में, मेरे पिता का वो असहाय चेहरा दिखता है मेरी माँ की भी वो उम्मीद दिखती है एक उम्र ढल गई है उस मंजिल को पाने के लिए पिता देर रात मेरी चिंता और सुबह सूरज उगने से पहले काम पर निकल जाते हैं और मैं वो अधूरा सपना देखते रह गया एक शर्म नाक पर छाई रहती है एक उदासी दिल में हर घड़ी पहरा देती रहती है पिता के सपने पूरे करने की उम्र में उनसे अपने सपनों के लिए मांगा करता हूँ मैं ये आँखें भर जाती हैं जब इस उम्र में भी अपने पिता को काम करते देखता हूँ मैं निशब्द मैं उनकी उम्मीद पर जो मुझपे लगाए बैठे हैं मैं कैसे हार जाऊँ, मेरे पिता ने मेरे लिए सपने देखे हैं एक और साल उस मंजिल के पीछे गंवा बैठा मैं हारा, उस पिता ने एक शब्द तक नहीं कहा मेरी हार में जो आस लगाए बैठे हैं मुझसे, जो आस लगाए बैठे हैं मुझसे प्रियांशु ♥️
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