प्रथम प्रेम
तू कितनी भोली हैं रे प्यारी, दिल का कोना हैं न्यारी, नहीं हैं तेरे रूप के लिए कोई शायरी, तू तो अपने नैनो ही सबको मारी। तू प्रथम प्रेम की प्रथम चिट्ठी हैं, तू उसमें भी प्रथम पृष्ठ मेरी हैं, प्रथम कहानी की प्रथमा तू हैं, सुबह का प्रथम प्रणाम तू हैं। बस! पता नहीं तू मेरी होगी या नहीं? तू दिल हैं मेरा तू हैं मेरा माही, तू मेरी कलम हैं नीली स्याही, मेरे दिल दिमाग में केबल तूही। आईना हैं तू, सुन ले मेरी मोहिनी, डाई शब्द प्रेम का तेरे लिए हंसिनी, तेरे नैना करते पागल मुझे ,सलोनी! तू मेरा आदि अंत तू मेरी दुकान का बोनी।
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