किस्मत.. 🥺🥺
सब कुछ नहीं मिला तो ये किस्मत का करम था, कुछ ख़्वाब टूटना ही मोहब्बत का भरम था। मुस्कुराकर छोड़ दिया हमने उसे मगर, सीने के हर एक ज़ख़्म में बस उसी का ग़म था। जिसे उम्र भर निभाने की क़सम खा बैठे थे, वो रिश्ता भी आख़िर इक लम्हे का वहम था। हर बार समझौता किया ख़ुद से ही हमने, क्योंकि हर किसी का बदल जाना भी उसे पसंद था। तू साथ नहीं है तो ये जीना भी सज़ा है, तेरे बिन हर एक दिन जैसे तन्हाई का मौसम था। कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कहे नहीं जाते, वो मुस्कान जो चेहरे पे थी —दिल का मातम था।
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