प्रेम !
राधे कृष्ण के प्रेम सा , कहा किसी का प्रेम हुआ । ना भेद था उसमें रंग का , ना जाती का तकरार हुआ । ना उम्र का कोई छेद था , ना संसार में ऐसा प्यार हुआ । लाखों गोपी होने पर भी , बस एक से उनकी प्रीत लगी । राधा को भी श्यामल राग के, कृष्ण से जाकर प्रीत लगी । प्यार की इस परिभाषा का , ना दूजा कोई मिल मिला । राधे कृष्ण के प्रेम सा , कहा किसी का प्रेम हुआ !! राधे राधे!!
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