मेरा इश्क
तुम्हें कुछ इस कदर चाहूंगा मैं। रखनी पड़ी सांसे भी गिरवी तो रख आऊंगा मैं। तेरी सांसों से खुद का गुजारा करूंगा। मैं इश्क तुमसे इतना सारा करूंगा। लगाकर बाजी मैं खुद की सांसों की। तुझको जिताकर मैं हारा करूंगा। तेरी सांसों से खुद का गुजारा करूंगा। मैं इश्क तुमसे इतना सारा करूंगा। मेरा इश्क तेरे लिए साफ पानी रहेगा। जो ना मिट सके वो निशानी रहेगा। उड़कर हवाओं की खुशबू में अक्सर जब भी बुलाओगी मिलने बुलाओगे आऊंगा मैं तुम्हें कुछ इस कदर चाहूंगा मैं। रखनी पड़ी सांसे भी गिरवी तो रख आऊंगा मैं
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