दयालु रानी
सोने का सिक्का उछालके, नदिया में उसकी परछाई की एक झलक दिखी। धूप हो या बारिश, हर मौसम में जरूरतमंदों को अपनी छत्र छाया में बांधते चली गई। हंसते मुस्कुराते हुए हर गांव में खुशियां बांटी। वो हूर की पारी अपने आंसुओं से लोगों की प्यास मिटाती गई।
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