व्यथा
प्रेम में समर्पण के बाद एक असफल औरत उस फूल की तरह हो जाती है...... जिसमे नहीं बचती महक बचती है... सिर्फ सुंदरता और अंदर रह जाता है..... एक खोखलापन... और सूनापन.......
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