आओ चलो सुन लो एस वन की...
आओ चलो सुन लो सब एस वन की कहानी, आदत है सदा से जिसकी देरी करने की पुरानी, लाज हया सब घोर के पीते करते हैं मनमानी, उम्मीद करना इनसे होता है खुद से बईमानी। आओ चलो सुन लो... क्या रवि क्या शनि हाल है सबका एक जैसा, बस हम पर ही है नैतिकता का सारा किस्सा, ब्रीफिंग में प्रभारियों का रहता हाई जोश है, डीब्रीफिंग में रहते सब अक्सर खामोश हैं। किसे करें दरख्वास्त किसे सुनाएँ ये परेशानी, हम पर क्या बीतती है ये बस हमने ही है जानी। आओ चलो सुन लो.. जब देखो घड़ी सुई की आठ पार जाती है, दहलीज पर थकी अँखियाँ बारम्बार जाती है, दूर दूर तक कोई तो दिखे यही एक आस जगती है, बेरहम सुई भी जल्दी ही घड़ी में साढे आठ करती है, मन ही मन खूब किलसते हैं पर सहते हैं इनकी शैतानी, कौन समझाये इन्हें अब इनके समझ में बात न आनी, आओ चलो सुन लो... शौचालय के बाहर गंभीर चिंतन होता है, कैसे देर किया इस पर खूब लड़कपन होता है, क्या जूनियर क्या सीनियर सबका एक ही हाल है, कछुआ भी शरमा जाये ऐसी तो इनकी चाल है, कुछ भी हो जाये सबने बस एक ही बात है ठानी, साढ़े आठ के बाद ही शिफ्ट रिलीव है करवानी। आओ चलो सुन लो...
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