दिल की बात
जिसे चाहा था पूरे दिल से उसी ने आज मेरा दिल तोड़ दिया मुझे ज़िन्दगी के मोड़ पर लाकर उसने सफर में मेरा हाथ छोड़ दिया जिसे मैंने अपना दिल माना था अपनी मोहब्बत के क़ाबिल माना था जिसे बड़े सलीके से छुआ था मैंने जिसका साथ ज़िन्दगी ही नहीं बल्कि मौत का भी जश्न मनाना था जिसका हाथ थामकर सात फेरे लेने थे उसके सारे ग़म लेकर उसे अपनी हर ख़ुशी के बसेरे देने थे उसी के नाम के आगे आज मैंने बेवफ़ा जोड़ दिया मैं उससे प्यार तो आज भी बहुत करता हूँ पर जितना टूटकर चाहा मैंने उसे उतनी ही बेदर्दी से उसने मेरा दिल तोड़ दिया .......
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