बालहठ
मुझे नया विशेषण मिला मिला आज नया पहचान जो आज तक मुझे दिखा नहीं मिला बालहठ रूपी सम्मान। मैंने सोचा कितना सत्य है ये कहीं ये छलावा या मिथ्या तो नहीं पर जब स्वयं का अध्ययन किया पाया बालहठ हमेशा मेरा हिस्सा रहा। कठिन समय में मेरा सच्चा साथी संकल्प सिद्धि के मार्ग का दीपक काल के गाल से प्राण छिन लाना विपरित परिस्थित में भी मुस्काना। मैं हठी हूं तभी आज जीवित हूं इसी कारण हैं इतनी उपलब्धियां हठ है कि मुझे कभी हारने नहीं देता मुझे बैठने नहीं देता रुकने नहीं देता। बालहठ जरूरी है पर हठ हो स्वयं से स्वयं से हो तो प्रेरणा है दुसरों से हो तो बंधन है। बालहठ कम हुआ है तभी स्थिरता है कभी तेज प्रवाह था जीवन में जब मैं थोड़ा हठी था।
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