अभी ज़िंदा हूँ मैं!!
अभी ज़िंदा हूँ.. मैं ठीक हूँ… या शायद नहीं… पर चल रहा हूँ बस इसी ज़िद में कहीं। मैं ठीक हूँ… मत पूछो ज़्यादा आज के लिए इतना काफ़ी है शायद। वो सुबह थी या शाम थी मुझे याद नहीं, भीड़ थी बहुत पर कोई अपना नहीं...।। लोग आगे भाग रहे थे किसी नाम के लिए, मैं पीछे रह गया बस एक सवाल लिए... कैसे कहूं कि, मैं ठीक हूँ… या बस दिख रहा हूँ, हँस तो रहा हूँ पर ,अंदर से बिखरा हूँ...।। मैंने सपने देखे थे बड़े तो नहीं… सिर्फ़ सच्चे, पर उन्हें समझाने का हुनर नहीं था इसलिए, चुप रहे सब रिश्ते...।। लोग कहते हैं “सब्र रख” मैं रख भी लेता हूँ, फिर भूल जाता हूँ। मैं हारा नहीं हूँ… बस थक गया हूँ, दुनिया से नही,खुद से।। मैं गा नहीं रहा… बस,खुद को संभाल रहा हूँ। मैं ठीक हूँ… या शायद नहीं… पर साँस चल रही है सब ठीक हो जाएगा… या नहीं… पर मैं अभी ज़िंदा हूँ…
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