दोहा
हो भीषण संग्राम ये महान अति दुष्ट है, पाक देश नापाक। ये है विश्वासी नहीं, कर दो इसको खाक।। बहुत सहा अब मत सहो, हो भीषण संग्राम। जबतक पाक मिटे नहीं, करो नहीं विश्राम।। दया नहीं इस पर तनिक, इसे करो बर्बाद। इसका विनाश शीघ्र हो, मिटे सभी अवसाद।। इससे समझौता नहीं, रहे न ऐसा मित्र। पाक मिले अब धूल में, कर दो उसे पवित्र।। कुछ भी विलम्ब हो नहीं, रहो नहीं अब शांत। शीघ्र शत्रु को ठोक दो,नहीं तनिक विश्रान्त।। नरेंद्र सिंह, 11.05.2025
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