मेरी कविता
तुझे लिखू, तुझे ही सोचु, तुझे कल्पनाओ मे गढ़ता जाऊ, बनाकर तुझे किताब अपनी, तेरी ही कहानी पढ़ता जाऊ। तेरे ही स्वप्न बुनु, तुझे ही चुनु, तेरे किस्सों का हिस्सा बनु, बनाकर इसे प्रेम सरगम अपनी, हर साँझ बस इसे ही सुनु। रास्ता वही है, मोड़ वही है, तेरे हाथो मे मेरी डोर वही है, वो पीपल का पेड़ वो गाँव की गली, वो नदी का छोर वही है। ये गलिया वही कहानी कहे, मेरे बिना तू एक पल ना रहे, सुरीली प्रेम कहानी ले अपनी, पवन सखी सरसराते बहे। वो नदिया के दोनों तन्हा छोर, वो खिलखिलाती हुई भोर, सुन रहै प्रेम कहानी अपनी, चांदनी रात मे चंदा संग चकोर। किताब मे रखा गुलाब कहा, तुझे रातो का हसीं ख्वाब कहा, हर किस्से मे हर हिस्से मे पाया, तुझे मेरी जिंदगी लाजवाब कहा। शायरी गजल गीत सारे तुझसे, साहित्य के रसीले धारे तुझसे, कल्पनाये सारी साकार तुझी से, मेरे जीवन के हसीं नजारे तुझसे। आ गये हम जो एक छत के निचे, खुशियाँ आ गई देख पीछे पीछे, राह के काटे हट गये देख सारे, स्वागत मे सारे पुष्प राहो मे बिछे। तुझे पाकर जिंदगी जैसे बन गई हो एक सुंदर कविता, विश्वास प्रेम समर्पण के साहित्य की बह रही है सरिता....!! ✍️नितिन कुवादे.... 😊
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