मां ( शहर आए)
अकेले पन में है उसकी याद आती, भूल भटकी गलियों में उसकी याद है आती दिखाई राह वो राह याद आती है, अंधेरा हो तो उसकी याद आती है रोशनी सा जलती पास सी थी वो, नींद न आए तो उसकी याद आती है, सुनाई पुरानी लोरी याद आती है, अब जीना खुद से है फिर न जाने क्यों उसकी याद आती है, लगता भूली परवरिश याद आती है, फिर लगा मां मतलब क्या है हमसे भी ज्यादा हमारी हो जाती है, सोने न देती भुखे, वो बात याद आती है रख ध्यान, अच्छा, बुरा वो मां बस उसकी याद आती है शहर आए फिर पता चला, उसकी क्या जरुरत है बिन उसके अब हमे पता स चल जाता।
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