सभ्य से शांत नदी की गहराइयों से उभर कर आई एक पंख फड़फड़ाती हुई चंचल तितली। हर फूल पर लहराती हुई गुदगुदी सी मुस्कान लिए फैलाया उसने गुड़ सा मीठा प्यार का संदेश।