जगजीत की याद में
गजलकार तो बहुत हैं जहां में, पर जैसा कोई जगजीत नहीं । होंठों को छू कर थी दिखाई, देखी ऐसी कोई प्रीत नहीं । उन्हें देखकर जो ख्याल आया घनी जुल्फ़ों से पाया जीत नहीं । देख कर देखता ही रह गया वो, प्यार का लिख पाया गीत नहीं । बात निकली जो हाथ न आई, कोई फरियाद हुई मीत नहीं । जगजीत तुम इतना मुस्कराए, झुकी-झुकी है नजर शीत नहीं । मनसीरत होश वाले हैं बेखबर, सफ़र में हैं नशे में संगीत नहीं ।
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