कोटि कोटि हृदय भावुक हैं
कोटि कोटि हृदय भावुक हैं कोटि कोटि आंखें छलक रही पांच सौ वर्ष के विरह के बाद अवध पुरी आज सज रही हैं प्रभु के आगमन पर आंखें बिछाए हैं ब्रह्मांड सारा नमन है उन बलिदानियों को जिन्होंने राम के नाम पर सर्वस्व वारा प्रसन्न है आज समस्त भारतवासी प्रसन्न है अवध की नर नारी कोटि-कोटि हृदय भावुक है कोटि-कोटि आंखें छलक रही हैं शताब्दियों के वनवास से प्रभु अपने महल में पधारे हैं देख कर मन प्रफुल्ल है धन्य भाग हमारे हैं पीढ़ियों के बलिदान का आज फल हमने पाया हैं प्रभु के आगमन से समस्त जग हर्षाया हैं प्रभु का बाल विग्रह देख हर दिल उन पर बलिहारी है कोटि-कोटि हृदय भावुक हैं कोटि-कोटि आंखें छलक रही हैं लव पुरी (पथिक)
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