।। अफ़सोश ।।
भटका हुआ मुसाफिर राह ढूंढ रहा हूं में क्या मुझे कोई रहा दिखाएगा अटका पड़ा हूं में क्या मुझे कोई सुलझा पाएगा भूल गए हम अपनी नियति को क्या मुझे कोई याद दिलाएगा बहुत बदल गया हूं पहले से में क्या मुझे अब कोई श्रीधर चेतन बुलाएगा ।। @6.15 , @gwl
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