तलाश
निकला हु आस में , सुकून मिलने की तलाश में, जहां हवाएं सहलाती हो, सीने से लगाती हो, उलझनों से दूर, वो अपना बनातीं हो , कोई सफर जो चिरागों के साथ हो, मोती सा श्रृंगार, सोने का उपहार हो हकीकत से दूर ख्वाबों के बाजार जहां..... दर्द नहीं दुलार हो, प्यार की खुशबू, खुशियों की बहार हो, जहां फूल खिले महकने को, कोई पंझी उड़े चहकने को, यू जंजीरें टूटे कि, हर बंदा आजाद हो बहकने को ,,,,,
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