अंदाज अनोखा
शान से आके अपने ही टशन में हर तरफ मुस्कुराहट फैलाते हुए निकल पढ़ती। ना कोई गुमान, ना टेंशन, बस समंदर की लहरों सी अपने ही धुन में खुशियां बटोरती चली।
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