अमृत ध्वनि छंद
शीर्षक--अभिनंदन 1 अभिनंदन है सैन्य को, वंदन शत-शत बार। रक्षा भारत की करे, रिपु पर करता वार। रिपु पर करता, मिटता मरता, सेना योद्धा। इसके बल पर,रहता बन कर, राष्ट्र पुरोधा।। इसके चलते,दुश्मन करते, रहते क्रंदन। इन वीरों को, इन हीरों को, है अभिनन्दन।। 2 अभिनंदन है ईश को, करता जो कल्याण। सारे संकट को हरे, जिन्दा रखते प्राण।।l जिन्दा रखते, रक्षा करते,ये दुखहर्ता। बने सहारा, तारण हारा,पालन कर्ता।। ऐसे स्वामी, अन्तर्यामी, को है वंदन। राम दयालु, महा कृपालु, को अभिनंदन।। नरेंद्र सिंह,31.05.2025
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