तुम मिलना मुझसे
मुझसे मिलना है तो आना मेरी बालकनी में जहां मैं बैठी एक सूनी राह को घंटों निहारती रहती हूँ और ना जाने क्यूँ अजनबी से नामों को बिना वजह पुकारती रहती हूँ मुझसे मिलना है तो आना मेरे तकिये के पास जिसने मेरे हजारो किस्सों को समेटे रखा है और मिलना मेरी उस चादर से जिसने मुझे मां के आंचल की जगह लपेटे रखा है तुम मिलना मेरी उन ख्वाहिशों से जो मुझे अब खुद जंजीरों सी लगने लगी तुम मिलना मेरी उन यादों से जो सिर्फ धुंधली तस्वीरों सी लगने लगी हैं तुम मिल लेना मुझसे मेरे बिखरने से पहले ही तुम मिल लेना मुझसे वक़्त निकलने से पहले ही
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