जिंदगी चाहती है
जिंदगी चाहती है कि, सब उसे, खुलकर जीयें । होठों पर सदैव ही , मुस्कान को सीयें । आंसूओं का कोई, इसमें ना स्थान हो । हर तरफ हो खुशी, सुखों का ही गान हो । हंसी के ठहाकों से, गूंजता जहान हो । मन में हो शांति, और बस संतोष हो । कोई किसी में भी, ढूंढता ना दोष हो । आपस में ना ईर्ष्या , ना कहीं घृणा रहे । एक दूसरे के लिए, प्रेम बस बचा रहे ।
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