किश्तों में ज़िंदगी-🙂
पिता की कमाई को पानी में धो कर, बना मैं मज़दूर — Graduate होकर। देख, बन मज़दूर दूसरों को, आज हम भी उसी भीड़ का हिस्सा हो गए। वो हँसते-खेलते बच्चे, आज ज़िम्मेदार हो गए। अलग उनका हुआ 9 से 9 का दिन, कैसे चलेगा आगे किश्तों के बिन, शाम देखे हुए ज़माने, क्या इसलिए निकले थे कमाने? माँ की कही हर बात ध्यान आती है, ये दुनिया हमें सताती है,और ख़ामियाँ कई गिनवाती है। मिलेगी कामयाबी आगे चलकर ,ये हौसला माँ रोज़ दिलाती है। अब घर की बड़ी याद सताती है। ज़िल्लत के बोझ और मन में संकोच लिए, हर शाम चले आते हैं| फिर ज़िम्मेदारी निभाने, छोड़ न यार... आज फिर दफ़्तर चले जाते हैं। कल तक जो बेफ़िक्र थे, वो आज ज़िम्मेदार हो गए। वो हँसते-खेलते बच्चे, आज जवान हो गए। -@tanya_singh
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