१३/१२/२०२४
मैने इश्क किया तुमने जाना नहीं। एक तरफा ही सही तुमने पहचाना नहीं, फूल तो खिलते ही हैं मुरझाने के लिए, तो क्या हुआ कि कब्र पर हूं, तुमने तो बालों पर बांधा नहीं। अक्सर मुरझा जाया करते हैं फूल, जिन्हें तोड़ा नहीं जाता। रह लेते हैं न वो भी जिन्हें छुआ नहीं जाता। फीके पड़ जाते हैं तो क्या हुआ, खुशबू चली जाती है तो क्या हुआ, तुम भी कमाल करते हो, मुझे देखकर घबराया करते हो, तो क्या हुआ तुमने मना किया मैने भी तो माना नहीं।।
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