नव वर्ष की नई राह
नए साल का नया सवेरा, खुशियों ने डाला डेरा। कुछ उम्मीदें, कुछ आशाएँ, साकार होतीं नव कल्पनाएँ। कुछ पराए, कुछ अपने हैं, कुछ मामूली सपने हैं। उत्साह-उमंग के साथ, नव कीर्तिमान रचने हैं। बीते वर्ष में कुछ सपने टूटे, कुछ स्वप्न हुए साकार। कहीं पतझड़ मिला, कहीं आई खुशियों की बहार। हर कदम पर नई उम्मीदें, सफलता लिए खड़ी हैं। ज़िंदगी के नए सवेरे में, नई उमंगों की लगी लड़ी है। चलना है कभी अकेले, कभी साथ-साथ में। जो बिछड़ गए, उनकी यादें- आएँगी बात-बात में। नया साल बस इतना करे, दिल फिर से मुस्कुरा जाए। थोड़ी-सी खुशियाँ हर रोज़, जीने का मन बढ़ा जाए। टूटे हौसले जुड़ते जाएँ, हर डर पीछे छूटता जाए। अपनों का साथ बना रहे, हर पल सुकून लाए। बीते कल की कड़वी बातें, वक़्त के साथ धुल जाएँ। नए सवेरे की रोशनी में, सपनों की राह खुल जाए… ✨ ✍️ नितिन कुवादे
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