तुम बिन
आज फिर तुम्हारे लिए कुछ अल्फाज़ लिखूँ क्या कुछ बीते लम्हे कुछ ज़ज्बात लिखूँ क्या लिखूँ की कैसे तुम्हारे बिना शाम अधूरी सी लगती है कुछ खाली है जिंदगी , कुछ पूरी सी लगती है कैसे कुछ अनकही ,बातेँ अभी भी बाकी हैं वो तुम्हारे सपनों वाली रातें अभी भी बाकी हैं वो तुम्हारे आने की आहट वो एहसास अभी भी बाकी हैं बस दिल ही नहीं लगता बाकी साँस अभी भी बाकी है लिखूँ की तुम्हारे बिना सबकुछ कितना मुश्किल रहा देखो तुम्हारे जाने के बाद क्या ये दिल वो दिल रहा कितनी खामोशी से देखो हम ये सब कुछ सह गए तुम्हारे बिना जी नहीं पाएंगे कहने वाले हम आज तुम्हारे बिना भी जिन्दा रह गए
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
