गहरा घाव
बरसो से दफनाई हुई बेरुखी नाराज़गी आज खुरडके निकली। ठान लिया कि अब तो इस चिरस्थाई दर्द का बेरहमी से अंत करन है। डर की धारा पर अंधकार का पर्दा डाल अंग अंग में बसे हिम्मत से अनंत सुकून की ओर कदम बढ़ते जान है।
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