तुम्हारे आने के बाद....
जिन्दगी मे तुम्हारे आने के बाद लगा जैसे - लम्बी निशा के पश्चात्, मेरे जीवन मे एक नवीन ऊषा आ गई। ऐसा भी नही कि पहले कभी भोर नहीं हुई, मगर तुम्हारे आने के बाद............ उस प्रभात जैसे मुझे जाग आ गई। हाँ कभी-कभी टूटती थी सुप्तावस्था बीच मे भी, मगर अभाग्य ये रहता कि , काल उस समय भी शर्वरी (रात) का ही होता नेत्र समझ नहीं पाये कि, उनके प्रयास में कमी है या रात अभी भी बाकी है ? मगर तुम्हारे आने के बाद ............. उस प्रभात लगा, जैसे एक बार की तुम्हारी दृष्टि ही काफी है। हसीन चहरों से रूबरू हुई थी कई दफा पहले भी मैं, मगर... तुम्हे निहारने के बाद लगा जैसे, इन लुभावने नयनों के समक्ष स्वयं रति भी शरमा गई। तुम्हारे आने के बाद.............. मेरी निगाहों को शायद परख अच्छी आ गई । रंगो से भरी तो है ये दुनिया आदि से ही मगर... तुम्हारे आने के बाद .... मन को सफेद भा गया। यूं महकते तो कई इत्र थे करीब से गुजरते हुए पहले भी मगर.. तुम्हारे आने के बाद से ............... सुधा सी एक सुगन्ध सब और छा गई। उस प्रभात से जैसे मुझे जाग आ गई।।
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