कहानी।
दीवारें घेरें, आत्मा बंधी हुई कोई आज़ादी की सांस नहीं, कोई जीवन की रोशनी नहीं माता-पिता के नियम, एक भारी जंजीर कोई दोस्त नहीं मिलते, कोई जीवन नहीं मिलता कोई यात्राएं नहीं, कोई बातें नहीं, कोई काkahaniम नहीं एक जीवन प्रतिबंधित, एक भविष्य दर्द में आज़ादी की पुकार, पंख फैलाने की इच्छा लेकिन नियमों से बंधी हुई, उसके सपने कट जाते हैं एक दिल जो तड़पता है, एक आत्मा जो चाहती है जीने के लिए, सांस लेने के लिए, सीखने के लिए लेकिन दरवाजे बंद हैं, कोई रास्ता नहीं दिखता एक जीवन अजीवित, एक भविष्य अनिश्चित अवसर दस्तक देते हैं, एक मौका भागने का एक रास्ता आज़ादी का, एक भविष्य देखने का लेकिन भावनाएं बंधी हुई हैं, एक दिल जो टूटा हुआ है परिवार के बंधन, एक प्यार जो जन्मा है हालांकि दम घुटता है, वह अलग होने से हिचकिचाती है छोड़ने का डर, एक भारी दिल क्या वह एक रास्ता ढूंढ पाएगी, एक पथ तोड़ने का? या भावनाएं हमेशा उसकी नियति होंगी? सपनों और सच्चे प्यार के बीच फंसी हुई एक विकल्प चुनना, एक भविष्य नया । सुभश्री पटनायक।
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