परित्याग
परित्याग हुआ तो पाषाण बनीं। साथ मिला तो यमराज से भिड़ गई। ये नारी है इसे कम ना समझना, अग्नि से मिल कर सीता कुंदन सी तप गई। पांच पतियों संग रहकर भी पांचाली चिर कुंवारी बनी रहीं महलों का सुख छोड़ शिवा शिव के वाम भाग में सजी रहीं। झुक गया समस्त सृष्टि का विधान, जब दुश्यंत के विरह में शंकुतला सदियों तक अपनी जिद पर अड़ी रही।
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