मंजिलें.....
मंजिलों को छूना तो एक आदत है ववो मंजिल मिल जाए यही एक इबादत है। जो नहीं मिला उसका प्रयास करो वो जीत ही क्या जिसका अभ्यास ना करो।। आज का फल कल मिलेगा तू कोशिश तो कर सब मिलेगा जो आने वाला है वो महान है , अभी इसे संभाल जो वर्तमान है।। क्यों डरता है दुनिया के तानों से याद रख अपनी मेहनत जो कि है तूने सालों से।। जब मंजिल मिलेगी तो सरे आम होगी और वहीं तेरी जुस्तजू समाप्त होगी।। ~ अर्पिता तिवारी
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