गुजरता हुआ साल
कौन रोक सकता है जिसको जाना है। इस ठंडी रात के बाद इस साल को भी गुजर जाना है। जिससे दुख हुआ उन बातों को भूल जाना है, अच्छी यादों को दिल में सम्भाल कर रखना है। गिले शिक्वों को न दिल से लगाना है, अपनों को दिल में बसाना है। गलत आदतों को ठिकाने लगाना है, खुशियों से अब घर को महकाना है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष को भी गुजर है जाना, है एक गुज़ारिश, जाते जाते हर आंगन को सुख , समृद्धि देकर जाना।
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