माँ
उसके बिना कोई भी शहर अच्छा नहीं लगता मिले मंजिल भले लाखों सफर अच्छा नहीं लगता उसे देखूँ तो लगती है मुझे दुनिया मेरी पूरी वो ना हो तो मुझे खुद का भी घर अच्छा नहीं लगता
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