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जय राम ,जय रघुनाथ, रघुपति जय प्रभू करुनायतन । जय धीर ,वीर, रघुवीर राघव ,कमल सम कोमल है तन।। है श्याम वर्ण ,कोमल चरण , पीत पटु साधे है तन । कर धनुष बाण है सज रहा अरु करुणा भरे प्यारे नयन।। हैं साथ माता जानकी और भक्ति है हनुमान की । संग में विराजे भ्रात सब शत्रुघ्न, भरत प्यारे लखन।। जय राम,जय रघुनाथ, रघुपति जय प्रभू। करुनायतन।
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