उम्मीद.....
किस पेड़ पर धागे बांधू किस मंदिर को जाऊँ मैं../ राम नाम तो कण कण मे फिर कैसे ना देख पाऊँ मैं..// यदि राम नाम ही लेने से ही हो जाता सबका काम है../ फिर मेरी पीड़ा क्यों ना हरते मेरे प्रभु श्री राम है...// दर-दर की मैं ठोकरे खाता हूँ इंसानों से...../ ये संसार भरा पड़ा है बस सिर्फ बेईमानों से...// दिखता न कोई अपना../ लगते सब पराये है....// दुनिया लगती मोह माया../ यहाँ हमको सब सताए है.....// इस बेसहारे इंसान को../ यहाँ रास्ता दिखाये कोई...// अपनाये कोई मुझे अपना.../ और मजिल पहुँचाये कोई....// है उम्मीद बस भगवन तुमसे../ मेरी नैया पार लगाओ.....// कब तक झेलूँ मैं ये दुख.../ अब तो अपना रूप दिखाओ...//
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