मूल रूप
सीधी साधी सी एक कुड़ी चल पड़ी आजमाने अपने हाथों की लकीरें। रास्ते थे काफी पथरीले, कभी किसी ने पीठ पर छुरा छूंका तो कभी मिली असफलता। पर आत्मविश्वास उसके रग रग में बहता था तो मंजिल पाए बीने रुकना नहीं था, यह खुद से वादा कर लिया ।
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